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Roshan Bharti   2017-11-16

भारत का पहला आदर्श गांव जहां धूम्रपान को कहा गया 'NO'

OnlineIndia डेस्क। हरियाणा के कैथल में एक ऐसा गांव है जहां पिछले दो सदियों से किसी ने धूम्रपान नहीं किया है। इस गांव का नाम मालखेड़ी है, जहां कोई भी व्यक्ति धूम्रपान नहीं करता। हैरान करने वाली बात तो यह है कि यह परंपरा पिछले 243 सालों से चली आ रही है। पंजाब की सीमा से लगे इस गांव की युवा पीढ़ी भी अपने बुजुर्गों की इस परंपरा को बरकरार रखने में मदद कर रहे हैं।

 

आस्था ने ली जागरूकता का रूप

1772 में सरदार जीवन सिंह ने गांव मालखेड़ी बसाया था और यह प्रतिज्ञा ली थी कि कोई भी व्यक्ति यहां हुक्का या बीड़ी नहीं पीएगा। आपको बता दें कि इस गांव में सदियों पहले बनाई गई यह परंपरा आज भी कायम है। गांव वालों का कहना है कि जीवन सिंह के बाद यह 11वीं पीढ़ी चल रही है लेकिन आज तक किसी ने भी इस परंपरा को नहीं तोड़ा। सदियों पुरानी इस परंपरा ने आज यहां जागरूकता का रूप ले लिया है। इस गांव के किसी भी दुकान में धूम्रपान से जुड़ी कोई भी चीजें नहीं मिलती। अगर कोई नया व्यक्ति बहार से आता है या फिर कोई रिश्तेदार इस गांव में आता है तो उससे सबसे पहले पूछा जाता है कि आपके पास तम्बाकू या गुटखा तो नहीं है। गांव वालों की इस अच्छी पहल को जानकर बहार से आए व्यक्ति इनके सवालों का बुरा भी नहीं मानते हैं।

 

दमा और खांसी मुक्त हुआ गांव

बीड़ी और सिगरेट नहीं पीने से आज तक किसी को यहां दमा, खांसी और कैंसर नहीं हुआ है। गांव वालों का कहना है कि उनके बुजुर्गों ने सदियों से बीड़ी सिगरेट नहीं पी है इसलिए गांव में दमा और खांसी का कोई मरीज नहीं है। आज यह गांव देशभर में एक आदर्श गांव के रूप में मिसाल बनकर सामने आया है।

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